इन्टरनेट क्या हैं और कैसे काम करता हैं? What is Internet? Internet की पूरी जानकारी

हेलो दोस्तो, इंटरनेट क्या है?, इंटरनेट की परिभाषा?, इंटरनेट की विशेषताएं?, इंटरनेट काम कैसे करता है?, इंटरनेट का इतिहास?, इंटरनेट के फायदे और नुकसान?, इत्यादि जैसे बहुत से इंटरनेट से जुड़े सवाल है जो हर रोज इंटरनेट पर लाखों स्टूडेंट्स द्वारा सर्च किए जाते हैं। इंटरनेट एक बेसिक चैप्टर है, जिसके बारे में जानना हर स्टूडेंट के लिए बेहद जरूरी होता है। अगर आप किसी Competition की तैयारी कर रहे हैं या आप एक स्टूडेंट है तो इंटरनेट के बारे में हर जानकारी रखना आपके लिए बहुत जरूरी है। इसलिए आज हम इस पोस्ट में इंटरनेट के बारे में हर छोटी और बड़ी जानकारी हासिल करेंगे।
इन्टरनेट क्या हैं और कैसे काम करता हैं? What is Internet? Internet की पूरी जानकारी

इंटरनेट नेटवर्क का सबसे बड़ा उदाहरण है। पूरी दुनिया में इंटरनेट के जरिए नेटवर्क के माध्यम से सभी लोग एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं। अगर आप इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो वह भी इंटरनेट के जरिए ही संभव हो पाया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंटरनेट क्या है? इंटरनेट का मालिक कौन है? इंटरनेट के फायदे और नुकसान क्या क्या है? इंटरनेट का इतिहास क्या है? आज के समय में हर जगह आपको इंटरनेट किसी न किसी रूप में मिल ही जाएगा। अब जिस चीज का इस्तेमाल हम हर समय करते रहते हैं, इसके बगैर हमारा कोई भी कार्य पूरा नहीं हो सकता, तो उसके बारे में हमें पूरी तरह से जानकारी होना भी बहुत जरूरी है।

इंटरनेट क्या है? (What is Internet?)

इंटरनेट सूचना तकनीकी (Information Technique) की सबसे आधुनिक प्रणाली (Modern System) हैं। इंटरनेट दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसे आप विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्क ओं का एक विश्व स्तरीय समूह खा सकते हैं। पूरी दुनिया से इस नेटवर्क में हजारों और लाखों कंप्यूटर एक दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं। यह एक ग्लोबल कंप्यूटर नेटवर्क होता है, जो कई प्रकार के सूचना और संचार सुविधाए प्रदान करती है। असल में यह इंटरकनेक्टेड नेटवर्क (Interconnected Network) का एक बहुत बड़ा जाल होता है।

सामान्य रूप से कंप्यूटर को टेलीफोन लाइन द्वारा इंटरनेट से जोड़ा जाता है। लेकिन इसके अलावा और भी बहुत से आधुनिक साधन है जिसके जरिए कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है। इंटरनेट किसी कंपनी या सरकार के स्वामित्व में नहीं होती है, बल्कि इसमें बहुत से सर्वर (Server) जुड़े रहते हैं, जो कई सारे अलग-अलग institute या कंपनी के हो सकते हैं। कुछ पापुलर इंटरनेट सर्विसेज है जैसे – gopher, FTP – File Transfer Protocol, WWW – World Wide Web, इन सभी का प्रयोग इंटरनेट में इंफॉर्मेशन प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

इंटरनेट को हम विश्वव्यापी विज्ञापन (Worldwide Advertising) का एक माध्यम कह सकते हैं। किसी प्रोडक्ट का Global Survey करने के लिए इंटरनेट सबसे आसान और सस्ता माध्यम हैं। जैसा कि ऊपर बताया गया है इंटरनेट, इंटरकनेक्टेड नेटवर्क का एक बहुत बड़ा जाल होता है जोकि साथ में एक दूसरे के साथ जुड़े रहने के लिए Standardized Communication Protocol का इस्तेमाल करते हैं। और इन्हीं जाल को इंटरनेट की लैंग्वेज में Media या Transmission Media कहा जाता है।

इंटरनेट, Client Server Architecture पर based होता है। जिसमें, जिस कंप्यूटर मोबाइल डिवाइस में इंफॉर्मेशन का यूज किया जाता है वह क्लाइंट (Client) कहलाते हैं और जहां पर सभी इंफॉर्मेशन सुरक्षित रखी जाती है उन्हें सर्वर कहा जाता है। जैसा की आप सभी जानते होंगे कि इंटरनेट पर मौजूद सूचनाओं को देखने या पढ़ने के लिए हम वेब ब्राउज़र (Web Browser) का इस्तेमाल करते हैं इन्हे Client Program कहते हैं। वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल करके इंटरनेट पर उपलब्ध विभिन्न सेवाओं का यूज कर सकते हैं।

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इंटरनेट का इतिहास (History of Internet)

वैसे तो इंटरनेट का आविष्कार कर पाना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं थी, लेकिन प्रोफेसर जी.सी लिकलाइडर (J.C. Licklider) ने सर्वप्रथम इंटरनेट की स्थापना करने का विचार 1962 दिया था। और इसी कारण इन्हें “इंटरनेट का जनक” भी माना जाता है। इंटरनेट का प्रारंभ 1969 में अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अर्पानेट (ARPANET – Advanced Research Project Agency Net) के विकास से किया गया। अर्पानेट को दुनिया का पहला नेटवर्क कहा जाता है।

1973 में इसका विस्तार इंग्लैंड और नार्वे तक हो गया था। 1974 में इसे सामान्य लोगों के लिए प्रयोग में लाने लायक बनाया गया, जिसे टेलनेट (Telnet) के नाम से जाना गया। 1982 में नेटवर्क के लिए सामान्य नियम बनाए गए जिन्हें प्रोटोकॉल (Protocol) कहा जाता है। इन प्रोटोकॉल को TCP/IP (Transmission Control Protocol / Internet Protocol) के नाम से जाना गया।

ARPANET का प्रयोग रक्षा विभाग में अनुसंधान व विकास के कार्य में किया गया। 1989 में arpanet को आम जनता के लिए खोल दिया गया। 1989 में टिम बर्नर्स ली हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज (HTML) का विकास किया। 1990 में ARPANET को समाप्त कर दिया गया और इंटरनेट का विकास किया गया। वर्ल्ड वाइड वेब (WWW – World Wide Web)  का प्रस्ताव भी टिम बर्नर्स ली के द्वारा ही 1989 में दिया गया था। इसी कारण, इंग्लैंड के वैज्ञानिक टिम बर्नर्स ली को वर्ल्ड वाइड वेब का जनक माना जाता है।

वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का सर्वप्रथम प्रयोग 6 अगस्त 1991 को किया गया। Mosaic, वर्ल्ड वाइड वेब पर प्रयुक्त होने वाला पहला ग्राफिकल वेब ब्राउज़र (Graphical Web Browser) था जिसका विकास मार्क एंडरसन (Mark Anderson) ने 1993 में किया था। 1993 में CERN – European Organisation for Nuclear Research ने वर्ल्ड वाइड वेब को आम लोगों के लिए बिल्कुल निशुल्क उपयोग हेतु उपलब्ध कराया। 15 अगस्त 1995 को विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) द्वारा भारत में इंटरनेट सेवा का प्रारंभ किया गया।

इंटरनेट कैसे कार्य करता है? (How Internet Works?)

दुनिया भर के अनेक छोटे-बड़े कंप्यूटर नेटवर्क को विभिन्न संचार माध्यमों से आपस में जोड़ने से इंटरनेट का निर्माण होता है। Internet, Client-Server Model पर काम करता है। इंटरनेट से जुड़ा प्रत्येक कंप्यूटर एक सर्वर से जुड़ा होता है और दुनिया के सभी सर्वर विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा आपस में जुड़े होते हैं। सर्वर अपने से जुड़े उपयोगकर्ता (Client) को मांगी गई सूचना या डाटा उपलब्ध कराता है। अगर मांगी गई सूचना या डाटा उस सर्वर के पास उपलब्ध नहीं है तो वह उस सर्वर की पहचान करता है जहां यह सूचना उपलब्ध है तथा उस सर्वर से सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध करता है।

इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों की बीच डाटा ट्रांसफर के लिए यह जरूरी है कि सभी नेटवर्क एक समान नियमों या प्रोटोकॉल का उपयोग करें। Open Architecture Networking के द्वारा TCP/IP के second level of rules के जरिए इंफॉर्मेशन का आदान-प्रदान करना और आसान बन गया। इसमें सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए पैकेट स्विचिंग (Packet Switching) का प्रयोग किया जाता है जिसमें सूचनाओं का पैकेट बनाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है।

इस कारण, एक ही संचार माध्यम का उपयोग विभिन्न उपयोगकर्ताओं द्वारा किया जा सकता है। इससे दुनियाभर के कंप्यूटर एक दूसरे से सीधे जुड़े बिना भी सूचनाओं का आदान प्रदान कर सकते हैं। किसी कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए हमें इंटरनेट सेवा प्रदाता (Internet Service Provider) की सेवा लेनी पड़ती है। टेलीफोन लाइन या वायरलेस तकनीक द्वारा कंप्यूटर को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के सर्वर से जोड़ा जाता है। इसके लिए हमें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को कुछ शुल्क भी देना पड़ता है।

इंटरनेट का मालिक कौन है? (Who owns internet?)

Internet Information System वास्तव में किसी एक व्यक्ति या संस्थान के नियंत्रण में नहीं हो सकता, यह इससे बिल्कुल परे है। क्योंकि इंटरनेट अनेक छोटे-बड़े कंप्यूटर नेटवर्क के आपस में जोड़ने से बनता है, इसलिए इंटरनेट पर अनेक संस्थानों, कंपनियों, शिक्षण संस्थाओं, सरकारी उपक्रमों तथा विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर्स का थोड़ा-थोड़ा स्वामित्व माना जा सकता है। इंटरनेट की कार्यप्रणाली की देखरेख करने और उनके International Standard को निर्धारित करने का कार्य कुछ स्वैच्छिक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं करती है। यह कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं है :-

i) ISOC (Internet Society)

यह एक गैर लाभकारी अंतररास्ट्रीय संसथान हैं जिसका गठन 1992 में इन्टरनेट से सम्बंधित मानकों (Standard), प्रोटोकॉल और नीतियों (Policies) का विकास करने और लोगों को इस सम्बन्ध में शिक्षित बनाने के लिए किया गया।

ii) Internet Architecture Board (IAB)

यह संस्थान इंटरनेट सोसायटी (ISOC) द्वारा निर्धारित नियमों के तहत इंटरनेट के लिए आवश्यक तकनीकी और इंजीनियरिंग विकास का कार्य करता है।

iii) ICANN (internet corporation for assigned names and numbers)

1998 में स्थापित यह संगठन इंटरनेट पर आईपी ऐड्रेस (IP Address) और डोमेन नेम (Domain Name) प्रदान करने तथा उसके मानको के निर्धारण का कार्य करता है।

iv) Domain Name Registrars

कुछ गैर सरकारी संस्थाएं ICANN द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार इंटरनेट के प्रयोग के लिए डोमेन नेम (Domain Name) प्रदान करती है जिन्हें डोमेन नेम रजिस्ट्रार कहा जाता है। विभिन्न डोमेन नेम रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति या संस्था को इंटरनेट पर एक विशेष (Unique) डोमेन नेम प्रदान किया जाए। डोमेन नेम रजिस्ट्रार का निर्धारण ICANN या Country Code Top Level Domain (CCTLD) द्वारा किया जाता है।

v) IETF (Internet Engineering Task Force)

इंटरनेट मानकों का विकास करना और उनके उपयोग को प्रोत्साहित करना इस संस्था का उद्देश्य है।

vi) W3C (World Wide Web Consortium)

यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो वर्ल्ड वाइड वेब के जनक टिम बर्नर्स ली के नेतृत्व में काम करती है। इसका गठन 1994 में किया गया। यह संस्था वर्ल्ड वाइड वेब के प्रयोग के लिए मानकों का निर्धारण करती है।

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इंटरनेट पर इस्तेमाल होने वाले प्रोटोकॉल्स (Protocols Used on Internet)

किसी भी नेटवर्क में दो या दो से अधिक कंप्यूटरों के बीच इंफॉर्मेशन के error free आदान-प्रदान को संभव बनाने के लिए जरूरी है कि दोनों कंप्यूटर एक समान rules और parameters को follow करें। नियमों तथा प्रतिमानों के समूह (Set of Rules And Standards) को प्रोटोकॉल (Protocol) कहा जाता है। कंप्यूटर नेटवर्क में प्रयोग किए जाने वाले कुछ पॉपुलर प्रोटोकॉल्स :-

TCP/IP क्या हैं?
TCP/IP इंटरनेट पर प्रयुक्त होने वाला सबसे लोकप्रिय प्रोटोकॉल है। इसका पूरा नाम TCP/IP – Transmission Control Protocol / Internet Protocol होता है। आपको बता दें की ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल (TCP) और इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) दो अलग-अलग प्रोटोकॉल होते हैं। लेकिन इनका प्रयोग एक साथ किया जाता है इसलिए इन्हें सम्मिलित रूप से इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (Internet Protocol Suite) कहा जाता है। इसका प्रयोग कर के इंटरनेट पर दो कंप्यूटर तथा सर्वर के बीच संचार स्थापित किया जाता है।

TCP/IP इंटरनेट का कम्युनिकेशन प्रोटोकोल है। ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल, पैकेट स्विचिंग तकनीक का प्रयोग करता है। जब किसी सूचना या डाटा को किसी कंप्यूटर या सर्वर द्वारा इंटरनेट पर भेजा जाता है, तो ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकोल (TCP) उस सूचना को छोटे-छोटे Units में divide कर देता है। इं groups को packets कहा जाता है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) हर एक पैकेट को एक विशेष address देता है और destination तक पहुंचने के लिए उनका रास्ता (Path) तय करता है। जरूरी नहीं कि किसी एक information के सभी packets एक ही रास्ते से destination तक पहुंचे, बल्कि यह अलग-अलग रास्तों से भी अपने destination तक पहुंच सकते हैं। नेटवर्क से जुड़ा राउटर (Router) प्रत्येक पैकेट को अपने destination तक पहुंचाने में मदद करता है। अगर एक Communication Medium में खराबी आती है तो डाटा पैकेट्स उपलब्ध Optional Communication Medium के द्वारा डेस्टिनेशन तक पहुंचाएं जाते हैं।

SMTP – Simple Mail Transfer Protocol

यह इंटरनेट पर ईमेल के लिए इस्तेमाल होने वाली सबसे पॉपुलर प्रोटोकॉल है। उपयोगकर्ता (Client) के कंप्यूटर से मैसेज को ईमेल सर्वर तक और फिर सर्वर से Receiver तक भेजने के लिए इस प्रोटोकॉल का प्रयोग किया जाता है।

HTTP – hypertext transfer protocol

यह वर्ल्ड वाइड वेब (www) पर Hyper Text Documents को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाली सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्रोटोकॉल है। वेब सर्वर से उपयोगकर्ता तक वेब पेज का ट्रांसफर इसी प्रोटोकॉल द्वारा किया जाता है। HTTP, Client Server Principle पर काम करता है। इसमें एक कंप्यूटर दूसरे कंप्यूटर से संपर्क स्थापित करके फाइल या डाटा भेजने का अनुरोध (Request) करता है। जिस पर दूसरा कंप्यूटर उस अनुरोध को स्वीकार करके संबंधित सूचना वापस भेजता है।

FTP – file transfer protocol

यह इंटरनेट पर इस्तेमाल होने वाला एक प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग इंटरनेट से जुड़े किसी कंप्यूटर तथा सर्वर के बीच फाइल ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। फाइल में data, text, graph, images, audio और video हो सकता है। फाइल ट्रांसफर के लिए Remote Computer से Login द्वारा संपर्क स्थापित किया जाता है। इसके बाद फाइल को अपलोड या डाउनलोड किया जाता है। फाइल ट्रांसफर के लिए उपयोगकर्ता के पास रिमोट कंप्यूटर तक जाने का अधिकार होना आवश्यक है।

Gopher

यह एक प्रोटोकॉल सॉफ्टवेयर है जो इंटरनेट द्वारा रिमोट कंप्यूटर से डाक्यूमेंट्स को खोजना, प्राप्त करना तथा उन्हें प्रदर्शित करना संभव बनाता है।

Telnet

टेलीनेट प्रोटोकॉल सॉफ्टवेयर प्रोग्राम द्वारा दो अलग-अलग स्थान पर स्थित कंप्यूटरों को Telecommunication Network द्वारा आपस में जोड़कर Remote कंप्यूटर के डाटा और फाइलों का उपयोग किया जाता है। इसे Remote Log-in भी कहा जाता है। Telnet द्वारा हम रिमोट कंप्यूटर का उपयोग ऐसे करते हैं, जैसे उसी कंप्यूटर के सामने बैठे हो। इसमें लोकल कंप्यूटर पर टाइप किया गया Command रिमोट कंप्यूटर द्वारा क्रियान्वित (Execute) किया जाता है तथा रिमोट कंप्यूटर में होने वाले प्रोसेसिंग और उसके रिजल्ट को लोकल कंप्यूटर के मॉनिटर पर देखा जाता है।

इंटरनेट का उपयोग (Uses of Internet)

वैसे तो आज के आधुनिक युग में इंटरनेट का इस्तेमाल हर क्षेत्र में होता है। ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं होगा जहां पर इंटरनेट का उपयोग नहीं होता है। इंटरनेट का उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में होता है :-

Research
इंटरनेट नेटवर्क का सबसे बड़ा Source होता है जहां पर लाखों करोड़ों की तादात में डाटा उपलब्ध होता है। इंटरनेट का इस्तेमाल लोग अपने रिसर्च के लिए भी करते हैं। इंटरनेट की मदद से किसी भी प्रकार का डाटा जैसे – files, documents, books, tools, etc. को प्राप्त किया का सकता हैं। इसलिए इंटरनेट के जरिए लोग research भी कर सकते हैं।

Education
इंटरनेट की मदद से एजुकेशन यानी पढ़ाई भी किया जा सकता है। आजकल इंटरनेट पर बहुत से ऑनलाइन कोर्सेज available है जहां से आप कुछ भी सीख सकते हैं। इंटरनेट पर Online Courses और Workshop मिल जाएंगे जिनसे आप बहुत कुछ सीख सकते हैं और साथ ही Live Classes भी Attend कर सकते हैं।

Electronic Mail

ईमेल के जरिए लोग अपना संदेश दूसरों तक पहुंचाते हैं। पहले लोगों को अपना संदेश एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने में काफी ज्यादा समय लग जाता था। पर इंटरनेट की मदद से इसे आसान बना दिया गया। अब इंटरनेट की मदद से लोग ई-मेल के जरिए तुरंत ही एक दूसरे के साथ अपना Message Share कर पाते हैं।

Shopping

टेक्नोलॉजी के साथ दुनिया भी बदल रही है, अब वह दिन गए जब शॉपिंग करने के लिए मार्केट और दुकानों में घूमना पड़ता था। अब आपको कोई भी चीज खरीदना है, तो आप अपने घर से ही इंटरनेट की मदद से उसे खरीद सकते हैं। अपनी मनचाही चीजें Internet के जरिए Online Order कर सकते हैं।

Job
आप इंटरनेट की मदद से अपने लिए, अपनी मनपसंद जॉब तलाश कर सकते हैं। इंटरनेट पर ऐसी बहुत सी वेबसाइट हैं जहां से आप अपने लिए Job तलाश भी कर सकते हैं, और अगर आपको Employee चाहिए, तो Job प्रदान भी कर सकते हैं।

Electronic News & Magazines

इंटरनेट की मदद से आप किसी भी भाषा में न्यूज देख और पढ़ सकते हैं, साथ ही यहां से आप मैग्जीन, बुक्स, आदि भी पढ़ सकते है। यहां पर आपको बहुत सी news की वेबसाइट मिल जाएंगी जहां से आप सभी खबरें फिर चाहें वो politics, sports, entertainment, weather, breaking news, etc. सभी ब्रेकिंग न्यूज आसानी से देख या पढ़ सकते हैं।

Download & Upload

इन्टरनेट से आप अपनी पसंद की कोई भी चीज डाउनलोड या अपलोड कर सकते हैं। यहाँ पर आपको एसी बहुत सी वेबसाइट मिल जाएँगी, जहाँ से आप मूवीज, सोंग्स, वीडियोस, फाइल्स, डाक्यूमेंट्स, आदि डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा आप इमेजेज, फाइल्स, आदि को इन्टरनेट में अपलोड भी कर सकते हैं।

Friendship
इन्टरनेट पर बहुत से सोशल मीडिया साइट्स उपलब्ध हैं जहाँ से आप नए दोस्त बना सकते हैं और अपने पुराने दोस्तों के साथ जुड़ सकते हैं। आप फेसबुक, ट्विटर, इन्स्ताग्राम, आदि जैसे सोशल मीडिया साइट्स के जरिये अपने दोस्तों के साथ video calling, voice calling, chatting, के जरिये जुड़ सकते हैं या नए दोस्त भी बना सकते हैं।

WWW क्या हैं? (WWW – World Wide Web)

इसे W3 या वेब (Web) भी कहा जाता हैं। यह इन्टरनेट पर उपलब्ध सबसे ज्यादा पोपुलर सर्विस हैं। यह हाइपर लिन्क द्वारा आपस में जुड़े हुए सूचनाओं का बहुत बड़ा group हैं, जिसे इन्टरनेट पर web browser की मदद से प्राप्त किया जा सकता हैं। वर्ल्ड वाइड वेब एक ऐसा network है जिसमें विभिन्न कंप्यूटरों में collected information को Hyper Text Documents की मदद से एक दूसरे से जोड़ा जाता है। इन सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए HTTP (Hyper Text Transfer Protocol) का प्रयोग किया जाता है।

वर्ल्ड वाइड वेब (www) ने इंटरनेट पर सूचनाओं का आदान प्रदान आसान बनाया है और इंटरनेट को “सूचना राजमार्ग” (Information Highway) में बदल दिया है। वर्ल्ड वाइड वेब (www) में stored हर एक पेज Web Page कहलाता हैं। यह वेब पेज HTML (Hyper Text Mark-up Language) का प्रयोग कर तैयार किये जाते हैं और Hyperlink द्वारा एक दुसरे से जुड़े होते हैं। वह स्थान जहाँ ये Web Page store करके रखें जाते हैं, Website कहलाते हैं।

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वर्ल्ड वाइड वेब और इन्टरनेट में अंतर (Difference Between WWW & Internet)

इन्टरनेट पर Available Service World Wide Web (www) की Popularity का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता हैं कि सामान्य रूप से वर्ल्ड वाइड वेब और इन्टरनेट का प्रयोग एक ही अर्थ में किया जाता हैं। पर वास्तव में www, इन्टरनेट पर आधारित एक सेवा (Service) हैं। वर्ल्ड वाइड वेब और इन्टरनेट में कुछ मूलभूत अंतर इस प्रकार हैं :-

i) इन्टरनेट एक अंतररास्ट्रीय संचार नेटवर्क (International Communication Network) हैं जो हार्डवेयर और सॉफ्टवेर का इस्तेमाल कर दुनियाभर में फैले छोटे बड़े कंप्यूटर नेटवर्क को आपस में जोड़ता हैं। जबकि, वर्ल्ड वाइड वेब केवल एक service हैं जो Hyperlink द्वारा आपस में जुड़े information का एक group हैं जिनका उपयोग साथ में किया जा सकता हैं।

ii) इंटरनेट के लिए इंटरनेट प्रोटोकोल सूट (TCP/IP) का प्रयोग किया जाता है जबकि वर्ल्ड वाइड वेब हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल (HTTP) का प्रयोग करता है।

iii) इंटरनेट के प्रयोग के लिए इंटरनेट सेवा प्रदाता (Internet Service Provider) को शुल्क देना पड़ता है जबकि वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट पर उपलब्ध एक निशुल्क सर्विस है।

iv) इंटरनेट हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों के समन्वय से कार्य करता है जबकि वर्ल्ड वाइड वेब केवल विभिन्न सॉफ्टवेयर का उपयोग करता है।

v) वर्ल्ड वाइड वेब एक सुविधा (Service) है और इंटरनेट उस तक पहुंचने का माध्यम (Medium) है।

इंटरनेट प्रोटोकॉल क्या हैं? (What is IP Address?)

इंटरनेट से जुड़े हर एक कंप्यूटर या डिवाइस को उसकी पहचान के लिए एक विशेष Numerical Address दिया जाता है, जिसे IP Address कहा जाता है। यह Numerical Address, इंटरनेट से जुड़ने पर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर द्वारा दिया जाता है। दुनिया भर में इंटरनेट से जुड़े किसी दो कंप्यूटर का आईपी एड्रेस एक समान नहीं हो सकता। आईपी एड्रेस इंटरनेट से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर को एक विशेष पहचान प्रदान करता है।

IP Address, इंटरनेट से जुड़ने वाले सभी कंप्यूटर को एक अलग पहचान देती हैं। इसमें कंप्यूटर या डिवाइस के जरिए इस्तेमाल होने वाले प्रोटोकॉल का नाम और नेटवर्क पर उसकी Location शामिल रहता है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) अगर किसी कंप्यूटर को Permanent IP Address प्रदान करता है तो उसे Static IP Address कहते हैं। अगर किसी कंप्यूटर के इंटरनेट से जुड़ने पर हर बार नया आईपी एड्रेस दिया जाता है तो उसे Dynamic IP Address कहा जाता है।

डोमेन नेम सिस्टम क्या है? (What is DNS – Domain Name System)

इंटरनेट से जुड़े हर एक कंप्यूटर या उपकरण को सर्वर द्वारा एक Special Numerical Address दिया जाता है, जिसे IP Address कहते हैं। इन Address को याद रखना एक कठिन काम हैं। कंप्यूटर सर्वर केवल बायनरी नंबर वाले अंकीय पते की ही पहचान कर सकता है। इस समस्या के हल के लिए डोमेन नेम सिस्टम (DNS) का प्रयोग किया जाता है। डोमेन नेम सिस्टम संख्याओं से बने आईपी एड्रेस को शब्दों से बने डोमेन नेम में बदल देता है जो याद रखने और उपयोग करने में आसान होता है। डोमेन नेम सिस्टम (DNS) में सभी डोमेन नेम और उससे संबंधित आईपी एड्रेस का संग्रह होता है।

जब हम किसी Web Browser पर किसी वेबसाइट का Domain Name टाइप करते हैं तो डोमेन नेम सिस्टम (DNS) उसे अंकीय पता (IP Address) में बदल देता है ताकि सर्वर उस कंप्यूटर की पहचान कर उससे संपर्क स्थापित कर सके। डोमेन नेम, Case Sensitive नहीं होते हैं, अर्थात उन्हें Capital Letters या Small Letters किसी में भी टाइप करने पर Same Result प्राप्त होता है।

Domain Name
नेटवर्क में हर एक वेबसाइट को एक Unique नाम दिया जाता है जो उस वेबसाइट का Address होता है। किसी भी दो वेबसाइट का Domain Name एक जैसा नहीं हो सकता। Domain Name System (DNS) Server, डोमेन नेम को IP Address में बदलकर उस वेबसाइट कि पहचान करता है। डोमेन नेम में वेबसाइट का नाम और एक्सटेंशन शामिल होता है। हर एक वेबसाइट का अपना अलग अलग नाम होता है, जबकि Extension कुछ निर्धारित विकल्पों में से एक हो सकता है।

Example : TechHindiGyan.com  |  Google.com  |  India.Gov.In, etc. डोमेन नेम और एक्सटेंशन को डॉट (.) के जरिए अलग किया जाता है। उदाहरण में .com, .gov, .in Extension हैं जबकी उससे पहले का नाम डोमेन नेम कहलाता है। वेब ब्राउज़र में किसी भी वेबसाइट का डोमेन नेम डालने से पहले उसमें www जोड़ा जाता है। अगर इसे वेब ब्राउज़र के Address Bar में टाइप ना किया गया हो, तो वेब ब्राउज़र से स्वयं जोड़ लेता है।

इंटरनेट के लाभ (Benefits of Internet)

इंटरनेट की मदद से अपना संदेश ईमेल के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक तुरंत भेजा जा सकता है।
 इसके जरिए हम घर बैठे अपने सभी प्रकार के बिलों का भुगतान आसानी से कर सकते हैं। इंटरनेट के जरिए हम ऑनलाइन मोबाइल रिचार्ज, टेलिफोन बिल, DTH बिल, बिजली का बिल, इत्यादि का भुगतान कर सकते हैं।
 इसके जरिए हम घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग भी कर सकते हैं। इंटरनेट की मदद से हम घर बैठे ऑनलाइन कोई भी सामान आसानी से खरीद सकते हैं।
 इंटरनेट की मदद से हमारी टाइम की तो बचत होती ही है, साथ में हम इसके जरिए बहुत कुछ सीख भी सकते हैं।
 इंटरनेट की मदद से हम ऑनलाइन क्लासेस अटेंड कर सकते हैं और पढ़ाई किया जा सकता है।
 इसके जरिए हर प्रकार के इंफॉर्मेशन को ढूंढा जा सकता है और रिसर्च किया जा सकता है।
 इंटरनेट में सोशल मीडिया के जरिए हम अपने दोस्तों के साथ जुड़ सकते हैं, और नए दोस्त भी बना सकते हैं।
 इंटरनेट की मदद से किसी के भी साथ Chatting, Voice Calling के साथ साथ Video Calling भी कर सकते हैं।
 इसके जरिए आप ऑनलाइन मूवी देख सकते हैं, वीडियोस और गाने डाउनलोड कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन गेम भी खेल सकते हैं।
 इसका एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि यहां पर आपको हर प्रकार के सवालों का जवाब आसानी से मिल जाता है।
 इंटरनेट की मदद से आप दुनिया से जुड़ सकते हैं। Latest News, Breaking News और हर प्रकार की खबर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

इंटरनेट के नुकसान (Disadvantages of Internet)

 इंटरनेट का सबसे बड़ा नुकसान इसका लत है। अगर आपको इंटरनेट की लत लग गई, तो आपका काफी ज्यादा समय बर्बाद होने लगेगा।
 हैकर्स (Hackers) इंटरनेट की मदद से किसी के भी कंप्यूटर की डाटा को चुरा सकता है।
 इंटरनेट के जरिए कंप्यूटर में वायरस भी आते हैं। जिस कारण आपके कंप्यूटर का डाटा खराब हो सकता है और आपका कंप्यूटर स्लो भी हो सकता है।
 इंटरनेट पर लोग बिना कुछ सोचे बहुत सी चीजें शेयर कर देते हैं। फिर चाहे वह इंफॉर्मेशन सही हो या गलत। इससे लोगों तक गलत जानकारी पहुंचती है जिस कारण उन्हें नुकसान भी हो सकता है।
 इंटरनेट पर बहुत सी वेबसाइट है जहां पर अश्लील कंटेंट होते हैं। जिनका बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
 इंटरनेट के सही इस्तेमाल से आपका वक्त बचता है। लेकिन वहीं अगर इंटरनेट की लत लग जाए, तो इससे आपका वक्त बर्बाद भी होता है।

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तो दोस्तों, अब आप सीख गए होंगे कि इन्टरनेट क्या हैं?, इन्टरनेट काम कैसे करता हैं?, इन्टरनेट का इतिहास?, इसके भायदे? इत्यादि। उम्मीद करता हूँ की आपको पोस्ट पसंद आई होगी। और मेरे बताये गए सभी बाते आपको समझ में भी आ गयी होंगी। अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल है, तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते है। पोस्ट पसंद आई हो तो प्लीज इस पोस्ट को अपने सभी दोस्तों के साथ सोशल मीडिया में जरूर शेयर करें। इसके अलावा THG को Follow करके सभी नए पोस्ट की जानकारी लगातार प्राप्त कर सकते है। 

Thanks / धन्यवाद 

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